30/11/2021

Nawazuddin Siddiqui – Zero से Hero

नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक सच्चे और वास्तविक अभिनेता हैं जो कोई भी अभिनय कर सकते हैं। वह छोटे शहर के लड़के का आदर्श उदाहरण है जिसने इसे जीवन में कुछ बड़ा किया । उन्होंने एक छोटी भूमिका से अभिनय की यात्रा शुरू की और वर्तमान में सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया हुआ है। 1974 में जन्मे, सिद्दीकी ने  गैंग्स ऑफ वासेपुर ’में एक प्रमुख अभिनेता के रूप में अभिनय किया। उन्होंने ‘तलाश’, ‘द लंचबॉक्स’, ‘किक’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया। उन्होंने सलमान खान, आमिर खान, वरुण धवन, शाहरुख़ खान, और टाइगर श्रॉफ जैसे सितारों के साथ काम किया। सिद्दीकी महान अभिनय से पूर्ण एक बहुमुखीव्(versatile) अभिनेता हैं।

Early Life and Personal Details (प्रारंभिक जीवन और व्यक्तिगत विवरण):

सिद्दीकी का जन्म 19 मई 1974 को U.P के मुज़फ्फरनगर डिस्ट्रिक्ट के एक छोटे से गाँव बुढ़ाना में हुआ था। उनके पिता, स्वर्गीय नवाबुद्दीन सिद्दीकी एक किसान थे और उनकी माँ मेहरूनिसा एक गृहिणी हैं। वह अपने घर में 6 भाइयों और 2 बहनों के साथ पले-बढ़े। यहीं उनका बचपन बीता, इंटरमीडिएट तक की पढाई भी इसी गाँव से की।  नवाज़ुद्दीन इंटर तक की पढ़ाई गाँव से करने के बाद हरिद्वार चले गए, क्यूंकी गाँव मे पढ़ाई लिखाई का माहौल नही था। हरिद्वार मे उन्होने गुरुकुल कंगरी विश्वविद्यालया से अपनी केमिस्ट्री में बीएससी की पढाई पूरी की। इसके बाद वो वडोदरा, गुजरात में एक कम्पनी में बतौर केमिस्ट काम करने लगे। इस काम में उनका मन नहीं लगता था, लेकिन कुछ न कुछ करना था इसलिए करते जा रहे थे।

Nawazuddin’s Life Turning Point:  एक दिन उनका दोस्त उसे एक थिएटर फिल्म दिखाने के लिए ले गया। उन्हें फिल्म पसंद आई जिसके बाद नवाज़ुद्दीन को एहसास हुआ कि उन्हें शायद इसी उद्देश्य से बनाया गया है । उन्होंने अपने दोस्त से इस बारे में सलाह ली, और दोस्त ने समझाया कि अभिनेता बनने के लिए, आपको अभिनय सीखना होगा। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला किया।

Nawazuddin Siddiqui’s Turning point

Nawazuddin Siddiqui Struggle(संघर्ष): एक्टिंग सीखने के लिए National School Of Drama (NSD), [www.nsd.gov.in/delhi] दुनिया की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। नवाज़ुद्दीन ने उसमे एडमिशन लेने का सोचा पर उसके लिए पहले से कुछ plays का experience चाहिए था, इसलिए उन्होंने एक प्ले ग्रुप ज्वाइन कर लिया, जिसका नाम था Shakshi Theatre Group; यही वो ग्रुप था जिसमे उनके साथ मनोज बाजपेयी और सौरभ शुक्ला भी एक्टिंग के गुड़ सीख रहे थे। नवाज़ुद्दीन छोटे-मोटे नाटक करने लगे।

        पर इन नाटकों से पैसे नहीं मिलते थे और दिल्ली में sustain करना था तो पैसे तो चाहिए थे। वे नौकरी तलाशने लगे। एक दिन उन्हें किसी public toilet की दीवार पर चिपका पोस्टर दिखा, लिखा था, “ security guards और watchman चाहिएं”। नवाज़ुद्दीन ने कांटेक्ट किया और उन्हें शाहदरा के पास एक toys factory में watchman की नौकरी मिल गयी। उसके बाद फिर ’नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ से 1996 में स्नातक(graduate) हुए ।

     उसके बाद ये मुंबई चले आये और मुंबई में बहुत स्ट्रगल किया, जहाँ से शुरू हुआ रिजेक्शन का दौर। Mumbai में उन्होंने NSD के senior से मदद मांगी, वो नवाज़ को अपने साथ रखने के लिए राजी तो हो गए पर उन्होंने कहा की उनके साथ रहने के लिए नवाज़ को उनके लिए खाना बनाना होगा।

 नवाज़ वो करने के लिए भी राज़ी हो गए आखिर उन्हें अपना सपना जो पूरा करना था। शुरुआत में उन्होंने TV serials में काम करने की कोशिश की, बहुत कोशिशों के बाद उन्हें serials में एक दो बार थोड़े समय के लिए छोटे रोल्स करने को तो मिला जहाँ उन्हें ज्यादातर notice नहीं किया जाता था। उसके बाद उनको ये realize हुआ की वहां उनकी सही जगह नहीं है। वो कभी कभी निराश होकर वापस अपने गाँव लौटने की सोचते थे लेकिन फिर उनको विचार आता कि वापस गाँव जाकर तो खेती करनी पड़ेगी और गाँव के लोग मजाक अलग उड़ायेंगे।

उनके टैलेंट को पह्चान्ने वाला कोई नहीं था, क्यूंकि वहां सिर्फ अच्छे दिखने वाले यानि सिर्फ outer appearance वालों को चांस मिलता था। नवाज़ के पास वो खूबसूरती नहीं थी जिससे उनको कुछ बड़ा रोल करने को मिलता।. इसलिए उन्होंने फिर फिल्मो में काम पाने की कोशिश की, जहाँ भी फिल्म की shooting चल रही होती थी नवाज़ वहां पहुच जाते थे और वहां काम की तलाश में रहते थे। जब कोई उनसे पूछता था की यहाँ क्या करने आये हो तो नवाज़ कहते थे मै एक्टर हूँ। उन्हें जवाब में यही मिलता था की दिखते तो नहीं हो, और उन्हें वहां से निकाल दिया जाता था। बार बार ना सुन सुन कर वो थक चुके थे। उन्हें इतनी बार मना किया गया था की वो कहते थे ना सुनने की आदत सी हो गयी है अब उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।   

स्वाभाविक है की अगर इंसान को उसके सपने पुरे होते हुए नहीं दिखता है तो वो frustrate हों जाता है। नवाज़ भी हो जाते थे, कई बार सोचते थे की सब कुछ छोड़ कर वापस अपने गाँव अपने माता पिता के पास चला जाऊं। लेकिन फिर यही सोच कर रुक जाते की वहां जा कर करेंगे क्या उन्हें तो सिर्फ़ एक्टिंग करना ही अच्छा लगता था। उसके अलावा उन्हें किसी और काम में मन नहीं लगता था। यही सोच कर फिर वो रुक जाते और फिर से काम की तालाश में निकल पड़ते। 

नवाज बताते हैं कि मुंबई में संघर्ष का यह ऐसा समय था कि वह एक समय खाना खाते तो दूसरे समय के लाले पड़ जाते।

हताशा के इन दिनों में नवाज़ ने बताया मुझे अपनी मम्मी की एक बात याद आती थी कि 12 साल में तो कचरे के ढेर के दिन भी बदल जाते हैं बेटा तू तो इंसान है।

Nawazuddin Siddiqui in Gangs Of Wasseypur

When Nawazuddin’s Career Started Shining:  एक दिन फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने दिल्ली में उनके एक नाटक को देखा और उन्हें अपनी फिल्म ब्लैक फ्राइडे ’में काम करने का मौका दिया, जिससे उन्हें अपनी क्षमता और प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। उसके बाद कई फिल्म निर्माताओं ने उन्हें फिल्म में भूमिका निभाने के लिए बुलाया, लेकिन सभी भूमिकाओं में नवाज़ुद्दीन  या तो चोर या आतंकवादी थे। इसलिए उन्होंने कई भूमिकाओं से इनकार कर दिया। फिर उन्हें फिल्म ‘पीपली लाइव’ में एक बेहतर भूमिका मिली और सुजॉय घोष की फिल्म ‘कहानी’ में उनके काम को सराहा गया। फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ के दौरान, निर्देशक अनुराग कश्यप ने नवाजुद्दीन से वादा किया कि वह निश्चित रूप से उनके साथ एक बड़ी फिल्म बनाएंगे ।

नवाजुद्दीन सफलता के बहुत करीब थे लेकिन सफलता अभी तक सही मायने में नहीं मिल पाई थी। लेकिन उनकी मेहनत और उनका साहस कभी नहीं टूटा और फिर उन्हें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ नाम की एक फिल्म मिली। इस फिल्म ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के जीवन को बदल दिया। उसी वर्ष नवाजुद्दीन की दूसरी फ़िल्म ‘मिस लवली’ भी रिलीज़ हुई। इस फिल्म में, वह प्रमुख भूमिका में थे। और तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को एक अलग पहचान दी। उस फिल्म के बाद ‘पीपली लाइव और’ कहानी ‘। फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अभिनय को काफी सराहा गया। और उसके बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज ऐसा कोई नहीं है जो उनको नहीं जानता।

Awards And Achievements:

Film fare Award for Best Supporting Actor

IIFA Award for Best Supporting Actor

National Film Award – Special Jury Award

Screen Award for Best Supporting Actor

Zee Cine Award for Best Actor in a Supporting role

Zee Cine Award for Best Performance in a Negative Role

Guild Award for Best Actor in a Supporting Role

Asian Film Award for Best Supporting Actor

Zee Cine Award for Best Actor in a Comic Role

Stardust Award for Best Supporting Actor

Guild Award for Best Actor in a Negative Role

Nawazuddin Siddiqui  received several awards for his incredible performances
Nawazuddin Siddiqui received several awards for his incredible performances

Life Advice: अपने सपनों का पीछा करें, चाहे आपको कितना भी दर्द उठाना पड़े, चाहे कितना भी समय लगे। लेकिन जब आप अंत में अपनी मंजिल पर पहुंचते हैं, तब आप कह सकते हैं कि “मैंने सब कुछ हासिल किया है” क्योंकि आपके लिए सब कुछ आपका सपना और आपका लक्ष्य ही था।

                  –सफलता सही दिशा में कड़ी मेहनत और समर्पण मांगती है। आप केवल अपने आप के रूप में आप अपने आप को होने की अनुमति देते हैं, कभी निराश नहीं होना चाइये, और कभी भी हार नहीं मानते हैं क्योंकि निरंतरता और समर्पण सफलता की कुंजी है। इसलिए समर्पित रहें क्योंकि यह रातोरात नहीं होता है।

Nawazuddin Siddiqui

                                                                                  

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