11/04/2021
MDH masala founder, Dharampal Gulati

MDH Masala founder धर्मपाल गुलाटी की amazing success story

Read Time : 5 min

आज हम आपको MDH Masala founder की Success Story बतायेंगे। जी आप सब MDH से तो भलीभाँति परिचित ही होंगे। आपने अपने  टेलीविज़न सेट पर MDH विज्ञापनों में एक बुजुर्ग व्यक्ति को देखते आये होंगे। यह बुजुर्ग शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद एमडीएच मसाला के मालिक श्री धर्मपाल गुलाटी हैं, जो वर्तमान में 25 करोड़ रुपये से अधिक के वेतन के साथ भारत में एफएमसीजी में सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ हैं, जो आज पूरे विश्व में Masala King ‘मसालों के बादशाह’ के नाम से प्रसिद्ध है।

MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिन्होंने अपने जीवन में ना जाने कितने उतार-चढ़ाव देखे लेकिन कभी परिस्थितियों से हार नहीं मानते हुए, कुछ पाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा और सफलता की राह पर लगातार आगे बढ़ते चले गये।

MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati का जन्म 27 मार्च 1923 को ब्रिटिश कालीन शासन में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था जो पहले भारत का ही हिस्सा था | उनके पिताजी Mahashay Chunilal Gulati और माता Chnan Devi आर्य समाज के अनुयायी और बहुत ही परोपकारी धार्मिक विचारों के व्यक्ति थे । पिताजी श्री चुन्नीलाल की सियालकोट में ही Mahashian Di Hatti (MDH) नाम से मिर्च-मसालों की बहुत प्रसिद्ध दुकान थी जिसकी स्थापना उनके पिताजी ने वर्ष 1919 में की थी | उनके पिता अपने हाथो से ही मिर्च-मसाले बनाते थे जिसके कारण पूरे  उस क्षेत्र में उन्हें ‘दिग्गी मिर्च वाले’ के नाम से जाना जाता था।


विनम्र शुरूआत:

MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati का मन कभी भी पढाई में नही लगा और वर्ष 1933 में उन्होंने 5th कक्षा उतीर्ण करके पढाई छोड़ दी जिससे उनके पिताजी को बहुत दुःख हुआ | इसके बाद पिताजी ने उनको जीवन में आगे बढ़ाने के लिए कुछ हुनर सीखने की सोची और एक बढ़ई के पास लकड़ी का काम सीखने भेजा लेकिन वहाँ 8 माह तक कार्य सीखने के बाद उन्होंने जाना बंद कर दिया |फिर उसके बाद उन्होंने चांवल की फैक्ट्री में और कपड़ों से लेकर हार्डवेयर तक आदि कई क्षेत्रों में कार्य किया पर किसी भी कार्य में उनका मन नही लगा। अंत में उनके पिताजी ने उन्हें अपने दुकान पर बैठा लिया और कुछ समय बाद उनकी अलग से एक मसाले की दुकान खुलवा दी | इसके बाद 18 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया जिसके बाद वो रात-दिन करके अपने कार्य को बढ़ाने लगे।

सामान्तया ऐसा कहा जाता है कि जीवन का चक्र कब घूम जाए कुछ पता नही चलता और यही  MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati और उनके परिवार के साथ हुआ, जब वर्ष 1947 में भारत की आज़ादी और उसका विभाजन हुआ। जिस सियालकोट में उनका बचपन से लेकर अब तक का समय बीता वो अब पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका था।

इसके बाद वो अपने परिवार के साथ अपना सबकुछ छोडकर भारत चले आये। जैसे-तैसे दंगो और कत्लेआम के बीच वो और उनका परिवार 7 सितमबर 1947 को अमृतसर में एक रिफ्यूजी कैंप में पहुंचे। उसके बाद कुछ दिन कैंप में रहने के बाद 27 सितम्बर 1947 को Mahashay Dharampal Gulati अपने जीजा जी के साथ काम ढूंढने हेतु, दिल्ली की ओर निकल गये और वहां करोलबाग में अपनी भांजी के फ्लैट में रहने लगे।

अब समय था दिल्ली में काम करने का इसीलिए उन्होंने अपनी जमापूंजी की 1500 रुपये में से 650 रुपये में एक तांगा और घोड़ा खरीदकर न्यू दिल्ली स्टेशन से क़ुतुब रोड और करोल बाग़ से लेकर बड़ा हिंदू राव तक प्रतिव्यक्ति 2 रुपये शुल्क लेकर तांगा चलना शुरू किया। लेकिन इससे इतनी कमाई भी नही हो पाती थी कि परिवार का भरण पोषण हो सके। कई-कई दिन तक तो उन्हें  तांगे में बैठने के लिए एक भी सवारी नहीं मिलती थी। यहीं नही लोग उन पर हँसते और मजाक उड़ाते थे। आख़िरकार 2 माह तांगा चलाकर उन्होंने इस कार्य को बंद कर दिया।


Mahashay Dharampal Gulati द्वारा Mahashian Di Hatti(MDH) को दिल्ली में शुरूआत


धर्मपाल गुलाटी ने आख़िरकार अपना खानदानी मसालों का कार्य फिर से दिल्ली में शुरू करने का मन बना लिया। उन्होंने अपना तांगा और घोड़ा बेचकर अजमल खान रोड, करोल बाग़ में एक लकड़ी का खोका खरीद कर छोटी सी दुकान, ‘Mahashian Di Hatti Siyalkot’ वाले के नाम से शरू कर दी। उन्होंने यहाँ रात-दिन एक करके मसाला कूटने और मिर्च पीसने का कार्य शुरू किया और उनकी  मेहनत रंग लाने लगी। 

मसालों की गुणवत्ता के कारण उनकी दुकान चल निकली और परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी, अपने बिज़नेस को और आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1953 में उन्होंने एक और दुकान चांदनी चौक में किराए पर ले ली । वर्ष 1959 में उन्होंने दिल्ली के कीर्ति नगर में मसाला फैक्टरी शुरू की जिसे Mahashian Di Hatti (MDH) कहा जाता था।

धीरे-धीरे अखबारों में दिए गए विज्ञापनों से भी उनके बनाये गये मसाले मशहूर होने लगे और व्यापार पूरे देश और विदेशो में बढ़ता चला गया। आज के समय में Mahashian Di Hatti (MDH) मसालों का एक ऐसा ब्रांड बन चुका है जो भारत की हर रसोई में उपयोग होता है।  Mahashian Di Hatti (MDH) पूरी दुनिया के 100 से अधिक देशों में अपने 60 से अधिक मसालों को एक्सपोर्ट करता है।

  • Mahashay Dharampal Gulati  Mahashian Di Hatti(MDH) कम्पनी के खुद ही प्रबंध निदेशक और ब्रांड एम्बेसडर है |
  • Mahashay Dharampal Gulati एक उद्योगपति होने के साथ ही प्रसिद्ध समाजसेवी भी है जिन्होंने समाज सेवा के उद्देश्य से कई अस्पतालो और स्कूलों का निर्माण करवाया
  • Mahashay Dharampal Gulati का घराना आज देश के टॉप अरबपति घरानों में आता है


अब, महाशय धर्मपाल गुलाटी के बारे में कुछ तथ्यों की बात करते हुए, यहां कुछ ऐसे हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं।

  • उसके 2 भाई और 5 बहनें हैं।
  • उनकी शादी 18 साल की उम्र में लीलावंती से हुई थी और उनके 2 बेटे और 6 बेटियां हैं, जिनमें से एक बेटे की 1992 में मृत्यु हो गई, जबकि उसकी पत्नी का उसी वर्ष निधन हो गया।
  • यह उनके पिता थे जिनकी सियालकोट में एक मसाला दुकान थी जिसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी का नाम MDH – ‘महाशियान डि हट्टी’ रखा। यह दुकान मिर्च मसालों के क्षेत्र में ‘दीगी मिर्च वेले’ के नाम से प्रसिद्ध थी।
  • उन्हें 8 महीने तक लकड़ी के काम का अनुभव था लेकिन उन्होंने इसका आनंद नहीं लिया। इसके अलावा, उन्होंने एक सोप फैक्ट्री, एक राइस फैक्ट्री और एक फैब्रिक फैक्ट्री में भी काम किया है, लेकिन कुछ भी उन्हें कभी मोहित नहीं किया।
  • धर्मपाल गुलाटी जी को पद्मा भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।

तो देखा आपने कैसे MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati ने जीवन में इतनी विषम परिस्तिथियों में भी हार नही मानी और फिर से एक नई शुरुआत करके इस मुकाम को हासिल किया |  आशा है कि आप लोगो को हमारी ये MDH Masala Founder Mahashay Dharampal Gulati की Real Life Inspirational Success Story से प्रेरणा मिली होगी ।

-> भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है, अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता।


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