25/10/2021

10 Indian Villages (भारतीय गाँव) जिन्होने खुद लिखी अपनी दास्ताँ

(10 Indian villages that wrote their own stories)

भारत में लगभग 6.5 लाख गाँव हैं, जहाँ देश की 68.8 प्रतिशत आबादी रहती है। भारत के विकास और समृद्धि में ग्रामीण विकास को एक महत्वपूर्ण पैरामीटर माना गया है। देश के अधिकतर गांवों में बिजली पहुंच गई है और सड़कें भी पक्की हो गई हैं। इनमें से कुछ गांव तो ऐसे हैं जो साफ-सफाई से लेकर बिजली पानी के मुद्दे पर शहरों को भी मात दे रहे हैं।

शुद्ध ताजी हवा, पतली-पतली पगडंडियां, हरियाली के बीच बने मिट्टी के घर और उनके आंगन में बिछी चारपाई, अंधेरा हो, तो तारों से सजा आसमान, ये पहचान है हिंदुस्तान के गांवों की। इसलिए दुनिया हमें ‘गांवों का देश’ कहती है। लेकिन हालात अब पहले जैसे नहीं। गांव बदल रहे हैं। शहरों से उनकी दूरियां भी कम हो रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सभी सांसदों को हर साल एक गांव गोद लेकर उसका विकास करना है। सांसदों ने इस योजना को स्वीकारा है और अपने-अपने संसदीय क्षेत्र के गांवों को भी गोद लिया है लेकिन हिंदुस्तान के कुछ गांव ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने दम पर बिना किसी सरकारी मदद के अपनी अलग पहचान बनाई है। फिर बात सड़क, पानी या शौचालय की हो, या वाई-फाई, इंटरनेट और सोलर एनर्जी की। दहेज जैसी कुरीतियों से भी इन गांवों ने जिम्मेदार ढंग से लोहा लिया है। आइए, आज आपको उन्हीं पगडंडियों से लेकर उन गांवों की ओर ले जाते हैं, जो किसी आदर्श से कम नहीं। हालांकि हैं तो बहुत सारे, लेकिन  thesuccessadda.com  आज आपको ऐसे ही 10 खास गांवों की सैर पर लेकर जा रहा है। इन्होने क्यों और कैसे अपनी दास्ताँ बनाई इसकी कहानी भी जानिए-

1. 100 फीसदी साक्षरता दर वाला गांव, हर बच्चा पढ़ा-लिखा –  पोथानिकड़,  केरल

 100 फीसदी साक्षरता दर वाला गांव, हर बच्चा पढ़ा-लिखा -  पोथानिकड़,  केरल
100% literacy rate in Pothinikar Village, kerala

 पोथनीकड़ देश का पहला ऐसा गांव है, जो 100 फीसदी साक्षर है। इस गांव में न सिर्फ शहरों की तरह स्कूल हैं, बल्कि प्राइमरी और निजी स्कूल भी हैं। इसके चलते गांव का हर बच्चा, जवान, बुजुर्ग और महिलाएं सब पूरी तरह से साक्षर हो चुके हैं।

2. बिना दरवाजे वाला गाँव – शनि शिंगनापुर, महाराष्ट्र

बिना दरवाजे वाला गाँव - शनि शिंगनापुर, महाराष्ट्र

सिर्फ घर ही नहीं, इस गांव के बैंक में भी दरवाजे नहीं हैं। शनि शिंगनापुर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है। यहाँ  के निवासियों को सुरक्षा की बहुत कम आवश्यकता महसूस होती है, जिसका श्रेय हिंदू देवता शनि को जाता है। शनि के प्रसिद्ध मंदिर यहाँ है अथवा विशेष सुरक्षा के लिए उनकी मान्यता है। यह माना जाता है कि देवता एक ग्रामीण के सपने में आए थे और गांव के दरवाजे को खत्म करने के का आदेश दिया था । अजीब बात है, सदियों से इस गांव में कोई चोरी नहीं हुई है। गाँव की परंपरा के बाद, 2011 में, यूनाइटेड कमर्शियल (UCO) बैंक ने गाँव में एक ‘लॉकलेस’ शाखा खोली, जो देश में अपनी तरह की पहली थी।

3. भारत का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित गांव – धरनई, बिहार

भारत का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित गांव - धरनई, बिहार

बिहार के जहानाबाद जिले में बोधगया के पास, धरनाई गांव में कुछ समय पहले तक, बिजली तक नहीं पहुंची थी। कुछ साल पहले, ग्रामीणों ने चीजों को अपने हाथों में ले लिया, और ग्रीनपीस की मदद से, एक सौर-ऊर्जा संचालित माइक्रो-ग्रिड स्थापित किया, जिससे 450 से अधिक घरों और 50 वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को 24 × 7 बिजली प्रदान की गई। ऊर्जा जरूरतों के मामले में 2,400 लोगों का घर अब आत्मनिर्भर है। धरनई के बच्चों को अब अपनी पढ़ाई को दिन के समय तक सीमित नहीं करना है, और पर्याप्त स्ट्रीटलाइट्स के साथ, महिलाएं रात में अपने घरों से बाहर निकलने से डरती नहीं हैं। छोटे उद्योग गाँव में समृद्ध हो रहे हैं।

4. परिंदों से प्यार करता है यह गांव- कोरकरेबेल्लूर, कर्नाटक

परिंदों से प्यार करता है यह गांव- कोरकरेबेल्लूर, कर्नाटक

कर्नाटक का इस छोटे से गांव का मानना है कि प्रकृति को संभालना ही जीवन है। ज्यादातर गांवों में माना जाता है कि परिंदे उनकी फसलों को तबाह कर देंगे, नुकसान पहुंचाएंगे, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। कोरकरेबेल्लूर के लोग परिंदों से खास लगाव रखते हैं और यही वजह है कि यहां पक्षियों को कुछ ऐसी प्रजातियां अब भी सांस ले रही हैं, जो अन्य जगह विलुप्त होने की कगार पर हैं। यहां के लोग परिंदों को अपना परिवार की तरह मानते हैं, उनका ख्याल रखते हैं और संरक्षण भी। यह एक बहुत ही अच्छाई वाली बात है।

5. वाई-फाई, सीसीटीवी, एसी क्लासरूम से लैस गांव- पुनसारी, गुजरात

 वाई-फाई, सीसीटीवी, एसी क्लासरूम से लैस गांव- पुनसारी, गुजरात

गुजरात के इस गांव को देखकर बड़े-बड़े शहर भी शर्मिंदा होंगे। बिना किसी सरकारी मदद के इस गांव ने अपने लिए जो सुविधाएं जुटाईं हैं, वो देश के किसी दूसरे गांव में नहीं हैं। पुनसारी एनआरआई गांव भी नहीं है। बावजूद यहां गांववालों ने खुद ही इंटरनेट, वाई-फाई, सीसीटीवी सुविधाएं जुटाई हैं। गांव का अपना मिनीबस कम्युनिकेट सिस्टम है और यहां के स्कूल के क्लासरूम भी एसी(AC) हैं। शायद आपको भरोसा न हो, लेकिन यहां ऐसी कई ऐसी सुविधाएं हैं, जिनके बारे में कोई सोच नहीं सकता।

6. एक गाँव जहाँ 111 पेड़ हर बार एक लड़की के जन्म पर लगाए जाते हैं – पिपलांत्री, राजस्थान

एक गाँव जहाँ 111 पेड़ हर बार एक लड़की के जन्म पर लगाए जाते हैं - पिपलांत्री, राजस्थान

राजस्थान की पिपलांत्री पंचायत इतनी अच्छी मिसाल पेश कर रही है कि शहर के लोग अपने ऊपर शर्मिंदा हो जाएं। इस गांव के लोग बेटी के जन्म लेने पर 111 पेड़ लगा कर बेटियों के साथ-साथ पर्यावरण रक्षा की अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर से 350 किलोमीटर की दूरी पर पिपलांत्री राजस्थान के राजसमंद जिले का एक गांव है, हालांकि यह इलाका संगमरमर की खदानों के लिए मशहूर है, मगर अब बेटियां और पर्यावरण बचाने के अभियान की वजह से सुर्खियों में है। पिपलांत्री पंचायत भी है। इस पंचायत में किसी भी परिवार में बेटी के जन्म लेने पर 111 पेड़ रोपे जाते हैं। गांव के लोग समुदाय के रूप में एक जगह जमा होते हैं और हर नवजात बालिका शिशु के जन्म पर पेड़ लगाये जाने का कार्यक्रम होता है इस अनूठी परंपरा की शुरुआत गांव के ही पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल ने कम उम्र में अपनी बेटी के गुजर जाने के बाद की थी। वर्ष 2006 से शुरू हुई परंपरा आज भी कायम है।

7. न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया में सबसे स्वच्छ गाँव – मावलिननॉन्ग, मेघालय

न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया में सबसे स्वच्छ गाँव - मावलिननॉन्ग, मेघालय

मेघालय राज्य में स्थित मावलिननॉन्ग एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव है। गांव में 2007 से पूरी तरह कार्यात्मक शौचालय वाले घर हैं। प्रत्येक घर में कचरे के संग्रह के लिए बांस के डस्टबिन लगाए गए हैं। इस गाँव में धूम्रपान, साथ ही साथ प्लास्टिक के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध है। कचरे को एक गड्ढे में खोदकर खाद के रूप में फिर से उपयोग किया जाता है। ग्रामीण एक साथ आते हैं और शनिवार को सार्वजनिक स्थानों, उसके स्कूल और उसके क्लिनिक को साफ करते हैं। ज्यादातर खासी जनजाति के सदस्यों का निवास है, गांव में एक मातृसत्तात्मक समाज है, और 100 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त है।

8. 60 करोड़पति वाला एक गाँव – हिवरे बाज़ार, महाराष्ट्र

Rich Indians. Calculative Indian
60 करोड़पति वाला एक गाँव - हिवरे बाज़ार, महाराष्ट्र

हिवरे बाजार , महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है, भारत का सबसे अमीर गाँव है। केवल कुछ साल पहले, हिवरे बाज़ार महाराष्ट्र के सबसे सूखा-ग्रस्त गाँवों में से एक था, जिसकी मासिक प्रति व्यक्ति आय 1995 में 830 रुपये थी। यह उसी समय के आसपास था, जब पोपटराव पवार, ग्रामीणों के बीच एकमात्र स्नातकोत्तर थे, अनिच्छा से ग्राम पंचायत चुनाव लड़े और सरपंच बने। पदभार ग्रहण करते हुए, उन्होंने ग्रामीणों को उनकी  22 शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मना लिया, और गरीब किसानों को ऋण देने के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र के साथ गठजोड़ करने के लिए ग्राम सभा संभाली । यहां से 35 किलोमीटर दूर एक गाँव रालेगन सिद्धि में अन्ना हजारे के काम से प्रेरित होकर, पोपटराव ने हिवरे बाज़ार में वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया। ग्रामीणों ने 52 मिट्टी के बाँध, 32 पत्थर के बाँध और नौ चेक बाँध बनाए और लगभग 300 खुले कुएँ खोदे। बढ़ते भूजल स्तर के साथ, हर कोई समृद्ध हुआ। आज, गांव देश में उच्चतम प्रति व्यक्ति आय का दावा करता है। यहां के ग्रामीणों की औसत आय हर महीने 30,000 रुपये है। इसके 235 परिवारों में से 60 करोड़पति हैं।

9. ऐसा गाँव जहां दहेज न कोई लेता, न देता- नीलांबुर, केरल

 ऐसा गाँव जहां दहेज न कोई लेता, न देता- नीलांबुर, केरल. Indian wedding

सात साल पहले तक केरल के नीलांबुर गांव के एक तिहाई लोगों के पास घर नहीं था क्योंकि उनकी ज्यादातर कमाई और बचत बेटियों की शादी में दिए जाने वाले दहेज में चली जाती थी। दरअसल, नीलांबुर पंचायत में हर महीने 60 शादियां होती थीं, जिसमें 3-4 लाख रुपए सिर्फ दहेज पर खर्च होता था। इसके चलते गांव की ज्यादातर आबादी दिवालिया हो जाती थी। 2009 में गांव के लोगों ने तय किया कि वे अब दहेज न देंगे और न ही लेंगे। इसके लिए गांव की पंचायत ने चौपालें लगाईं, वर्कशॉप्स आयोजित किए, डोर-टू-डोर कैंपेन चलाया और नुक्कड़ नाटकों का भी सहारा लिया। असर हुआ। कुछ ही समय में पूरा गांव दहेज मुक्त हो गया। अगले दो सालों में नीलांबुर को देख आसपास के गांवों ने भी दहेज प्रथा को तिलांजलि दे दी। स्वयंसेवी संस्था ‘Dump dowry’ ने भी इलाके में बहुत काम किया। संगठन के चलते महंगी शादियां सामूहिक शादियों में तब्दील हो गईं। जल्द ही महिला समख्य सोसायटी www.dowryfreemarriage.com वेबसाइट लॉन्च करने जा रही है।

10. मंजगाम गाँव-  जम्मू एवं कश्मीर

मंजगाम गाँव-  जम्मू एवं कश्मीर. Kashmir village. manjgam village. Indian Village

जम्मू और कश्मीर का नाम आते ही हम सबके मन में अशांति और सुरक्षाबलों से घिरे लोगों की तस्वीर कौंध जाती है। ऐसा माना जाता है कि कश्मीर अभी शांति और विकास से कोसों दूर है, लेकिन वहां के  एक गांव की स्थिति इसके ठीक उलट है। श्रीनगर के मंजगाम एक ऐसा ही गांव है जहां मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी होने के बाद भी वहां सारे हिंदू-मुस्लिम मिलकर एक दूसरे का त्योहार मनाते हैं। मंजगाम जिले का पहला गांव है, जिसे गो डिजिटल गो कैशलेस प्रोग्राम के तहत पहला कैशलेस गांव बनाया गया है। गांव में हर व्यक्ति का अपना-अपना खाता है। गांव की आबादी करीब 2000 है और 200 से ज्यादा घर हैं जिसमें कम से कम एक सदस्य को ट्रेनिंग दी गई है।

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                         — भारत का भविष्य इसके गाँवों में है ”- महात्मा गाँधी।

                         (The future of India lies in its villages”- Mahatma Gandhi)

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